Poetry of Yasra Rizvi
मुझे मोहब्बत मे नाकामी हुइ हि नही आज तक मैने जिन्दगी मे कभी नाकाम मोहब्बत नही की इस लिये मुझसे मोहब्बत करने वाले कभि मुझे छोड नहि पाये शायद ..... मुझे नहि याद पड्ता ऍसा कोइ मर्द औरत जिन से मेरा मोहब्बत का रिस्ता रहा हो वोह मुझे completely छोड पाये हो मुक्क्मल तौर पर ..... ढुढं लेते है मुझे कइ सालो बाद कइ महिनो बाद मुड्के वापस जरुर आते है। मैने मोहब्बत और तिजारतका (रोज़गार, व्यापार) फर्क हमेशा बहूत वाजिब रखा मोहब्बत और तिजारत मे फर्क होता है , नफा नोक्शान धन्दे मे देखा जाता है मोहब्बत मे थोडे देखा जाता है । Yasra Rizvi's poetry